शीत युद्ध का इतिहास, प्रमुख कारण, प्रभाव, एवं अंत
शीतयुद्ध किसे कहते है ? शीत युद्ध जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह अस्त्र-शस्त्रों का युद्ध न होकर धमकियों तक ही सीमित युद्ध है। इस युद्ध में कोई वास्तविक युद्ध नहीं लड़ा गया। शीत युद्ध एक प्रकार का वाक युद्ध ( वाक युद्ध (war of words) अर्थात वह युद्ध जिसमें हथियार के स्थान पर बोली , वचन का प्रयोग हो , लोग अपनी बातों से दूसरे को हराने का प्रयास करें।) था जो कागज के गोलों , पत्र-पत्रिकाओं , रेडियो तथा प्रचार साधनों तक ही लड़ा गया। इस युद्ध में न तो कोई गोली चली और न कोई घायल हुआ। इसमें दोनों महाशक्तियों ने अपना सर्वस्व कायम रखने के लिए विश्व के अधिकांश हिस्सों में परोक्ष युद्ध ( indirect war) लड़े। युद्ध को शस्त्र युद्ध ( arms war) में बदलने से रोकने के सभी उपायों का भी प्रयोग किया गया। यह केवल कूटनीतिक उपयों द्वारा लगा जाने वाला युद्ध था जिसमें दोनों महाशक्तियां एक दूसरे को नीचा दिखाने के सभी उपायों का सहारा लेती रही। इस शीत युद्ध का उद्देश्य अपने-अपने गुटों में मित्रा राष्ट्रों को शामिल करके अपनी स्थिति मजबूत बनाना था ताकि भविष्य में ...