पश्चिमी अफ्रीका के 8 देशों ; माली , नाइजर , सेनेगल , बेनिन , टोगो , बुर्किना फासो , गिनी-बसाउ , और आइवरी कोस्ट ने सीएफए फ्रैंक की जगह नई मुद्रा इको को चलाने का फैसला किया है. आइये इस लेख में जानते हैं कि यह निर्णय क्यों लिया गया है ? कहते हैं कि बिना "अर्थ" के कोई तंत्र ' नहीं होता है. इसी प्रकार बिना करेंसी को कोई देश भी नहीं होता है. किसी देश की करेंसी उस देश की पहचान होती है. इसी पहचान को बनाने के लिए पश्चिमी अफ्रीका के 8 देशों ; माली , नाइजर , सेनेगल , बेनिन , टोगो , बुर्किना फासो , गिनी-बसाउ , और आइवरी कोस्ट ने फ्रांसीसी उपनिवेश काल से चली आ रही गुलामी को ख़त्म करते हुए फैसला किया है कि वे वर्तमान में प्रचलित मुद्रा ‘ सीएफए फ्रैंक ’ की जगह अपने देश में एक नई मुद्रा "इको" का इस्तेमाल करेंगे. इकोवास ( ECOWAS) क्या है ? अफ्रीका महाद्वीप को आर्थिक पिछड़ेपन के कारण ‘ काला महाद्वीप ’ कहा जाता है लेकिन अब यह महाद्वीप अपने नाम को बदलने की राह पर चल पड़ा है. इसी दिशा में कदम उठाते हुए पश्चिम अफ्रीका के 15 देशों ने लागोस की संधि पर हस्ताक्षर...
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